सर्दियों में ताज़ी सब्ज़ियाँ क्यों नहीं मिलती थीं
कश्मीर की सर्दियाँ बहुत लंबी और कड़ी होती हैं।
कई महीनों तक खेतों में कुछ नहीं उगता था।
इसलिए लोग पहले से ही सर्दियों की तैयारी कर लेते थे।
वे ऐसी सब्ज़ियाँ चुनते थे जो:
आसानी से उग जाएँ
लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकें
शरीर को शक्ति और पोषण दें
गांठ गोभी इन सभी बातों पर खरी उतरती थी।
गांठ गोभी
को सुरक्षित रखने का तरीका
गर्मियों के समय:
गांठ गोभी को पतले टुकड़ों में काटा जाता था
घर की छतों पर धूप में सुखाया जाता था
फिर सर्दियों के लिए संभाल कर रखा जाता था
जब सर्दियों में ताज़ी सब्ज़ी नहीं मिलती थी,
तब यही सूखी गांठ गोभी पकाई जाती थी।
ठंड के मौसम के लिए उपयुक्त भोजन
सर्दियों में शरीर को ऐसे भोजन की ज़रूरत होती है जो:
ऊर्जा प्रदान करे
पेट को भरा रखे
ठंड से बचाने में मदद करे
गांठ गोभी को साधारण तरीके से पकाया जाता था
और यह रोज़ के भोजन का हिस्सा होती थी।
कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता था
कश्मीर में गांठ गोभी का:
नीचे का हिस्सा सब्ज़ी के रूप में
हरे पत्ते भी भोजन में
कभी-कभी अचार बनाने में भी उपयोग होता था
कुछ भी फेंका नहीं जाता था।
यह कोई नया चलन नहीं था
गांठ गोभी को सर्दियों के लिए तैयार करना कोई फैशन नहीं था।
यह पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा थी।
बड़े लोग बच्चों को यह काम सिखाते थे
और यह ज्ञान धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहता था।
आज भी गांठ गोभी क्यों महत्वपूर्ण है
आज लोग फिर से प्राकृतिक और सरल भोजन की ओर लौट रहे हैं।
ऐसे में गांठ गोभी जैसी सब्ज़ियाँ फिर से अहम हो गई हैं।
यह हमें सिखाती है:
मौसम के अनुसार भोजन करना
घर का सादा और शुद्ध खाना
प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीना
अंतिम बात
गांठ गोभी केवल एक सब्ज़ी नहीं थी।
यह कश्मीर की समझदारी और जीवनशैली का प्रतीक थी।
इसी वजह से यह सर्दियों में कश्मीर का
ज़रूरी भोजन बन गई।